http://नोहर,जिला,हनुमानगढ़ राजस्थान। दवा विक्रेता समुदाय ने मेडिकल लाइसेंस पर कन्वर्जन मामले को लेकर ज्ञापन सौंपा व फैसले पर पुनर्विचार के लिए निवेदन किया। आयुक्तालय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, राजस्थान की औषधि नियंत्रण विंग के उच्चाधिकारियों की दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को हुई बैठक में लिये गये निर्णयों के विरोध में हनुमानगढ़ जिले के समस्त दवा विक्रेताओं ने गुरूवार को पूर्व अध्यक्ष प्रेम सेतिया के नेतृत्व में जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बैठक की कार्यवाही के बिन्दु संख्या 9 के तहत नये दवा लाइसेंस, लाइसेंस नवीनीकरण एवं पुराने लाइसेंसों की समीक्षा के दौरान व्यवसायिक उपयोग कन्वर्जन को अनिवार्य किये जाने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई गई। कैमिस्ट समुदाय ने बताया कि अतिरिक्त आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रक के कार्यालय द्वारा 29 दिसंबर 2025 को जारी बैठक कार्यवाही विवरण के अनुसार दवा लाइसेंस नवीनीकरण एवं पुराने लाइसेंसों की समीक्षा के समय व्यवसायिक उपयोग कन्वर्जन की शर्त लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से प्रदेशभर में संचालित दवा व्यवसाय पर गंभीर, अव्यवहारिक एवं दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। ज्ञापन में बताया गया है कि राजस्थान के अधिकांश कस्बों एवं शहरों में दवा की दुकानें कृषि अथवा आवासीय भूमि पर वर्षों से संचालित हैं, जिनके भू-भाग सड़क या मुख्य मार्ग पर खुलते हैं। ऐसे स्थानों पर पचासों वर्षों से विभिन्न प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियां सुचारु रूप से चल रही हैं। यदि दवा लाइसेंस के लिए व्यवसायिक कन्वर्जन को अनिवार्य किया जाता है तो प्रदेश की बड़ी संख्या में दवा दुकानें बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगी, जिससे आमजन को आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कैमिस्ट समुदाय ने यह भी स्पष्ट किया कि दवा कोई सामान्य व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि जीवन रक्षक एवं आवश्यक वस्तु है। ऐसे में दवा व्यवसाय पर अतिरिक्त एवं अव्यावहारिक शर्तें थोपना जनहित के विपरीत है। छोटे कस्बों, ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में कन्वर्जन प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और समयसाध्य है, जिसे पूरा करना अधिकांश दवा विक्रेताओं के लिए संभव नहीं हो पाएगा। दवा विक्रेताओं ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर से आग्रह किया कि उक्त निर्णय पर पुनर्विचार कराते हुए दवा व्यवसाय हेतु व्यवसायिक उपयोग कन्वर्जन परिसर/दुकान की बाध्यता को समाप्त किया जाए। कैमिस्ट समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो दवा आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष प्रेम सेतिया, इन्द्र सिंह राठौड़, जितेश गोयल, सतीश कटारिया, नरेन्द्र मिड्ढ़ा, मांगीलाल, बलराज सिंह, रायसाहब आहुजा, राजेश कुमार गुप्ता, अमित मिगलानी, अंकित अरोड़ा, मोनू नागपाल, महबूब खान, विनोद कुक्कड़, साहिल गर्ग, विपन तनेजा, जयकिशन चावला, वीरेन्द्र सिड़़ाना व अन्य दवा विक्रेता शामिल थे। अखंड भारत नई दिल्ली से मोहरसिंह की खास रिपोर्ट।